उभरते हुए पुस्तक लेखक अरविंद कुमार के पिता स्वर्गीय रामसेवक प्रसाद बिहार राज्य के रोहतास जिला अंतर्गत डालमियानगर अवस्थित उद्योग समूह में कार्यरत थे ।जुलाई 1984 में उद्योग समूह के बंद हो जाने के पश्चात अरविंद का बचपन मुफलिसी में बीता। दो भाइयों और चार बहनों में सबसे बड़ा इस व्यक्ति के कंधों पर जल्द ही घर की जवाबदेही आ गई ,जब फैक्ट्री बंद होने के पश्चात प्राइवेट ट्यूशन से गुजारा चलाने वाले अरविंद के पिता अचानक से 1993 में पार्किंसन डिजीज से ग्रस्त हो गए। 

 ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्चा चलाना तथा प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी दोनों एक साथ करना काफी मुश्किल भरा कार्य था। अरविंद ने 1999 में रेलवे में ESM के पद पर  योगदान तो कर लिया परंतु यह नौकरी रास नहीं आई ,क्योंकि इनके सपने बड़े थे । इसी बीच नवंबर 1999 में बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के द्वारा बिहार में शिक्षक के पद पर नियुक्ति हुई  जिसमें इनका भी चयन हुआ । 2013 में स्नातक विज्ञान शिक्षक तथा 2014 में प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति प्राप्त हुई। परंतु बड़ा अधिकारी बनने का इनका  सपना पारिवारिक एवं व्यक्तिगत कठिनाइयों के कारण पूरा नहीं हो सका।विज्ञान के अलावे साहित्य से रुचि रखने वाले अरविंद ने 2018 में नोशन प्रेस चेन्नई से अपनी पहली पुस्तक "अमरत्व की उम्मीद :एक नई अवधारणा" प्रकाशित कराई जिसे शिक्षक साथियों ने काफी पसंद किया और उन्होंने खुद उसकी 1000 प्रतियां अपने शिक्षक साथियों के बीच बिक्री की। 

2020 के कोरोनावायरस काल में खाली बैठे अरविंद ने आजादी के बाद देश के प्रगति पर दूसरी पुस्तक "भारतीय संविधान कुछ: सवाल??लिखा जो  बुक्स क्लीनिक पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई । अत्यधिक संख्या में  पुस्तक की बिक्री नहीं हो पाई है, परंतु लेखक का  लेखन कार्य जारी है । इनकी रचनाएं स्टोरी मिरर, टीचर्स ऑफ बिहार ,लिटरेरी सोसायटी आफ इंडिया इत्यादि में छपा करती है । 

लेखक का विचार है कि जाति ,धर्म में कोई भेद नहीं है और अगर इसे खत्म किया जा सकता तो शायद हम  स्वाभाविक मानव बन पाते।  कार्य  मजदूरी सिद्धांत पर व्यक्तिगत रूप से शोध कार्य का कर रहे हैं जो पुरा होने के पश्चात दुनिया के कार्य मजदूरी के रूप को एक नया आयाम मिल पाएगा।

 अरविंद कुमार 

Quqrter- S/393, डालमियानगर रोहतास, बिहार, 

88 25 36 32 64

 arvind.brpdehri@gmail.com